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हिंदी के वैश्विक सरोकार

Posted On: 13 Sep, 2013  
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बहुत पक्का है ,कच्चे धागों का बंधन

Posted On: 20 Aug, 2013  
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धार्मिक व्योम के चंद्रमा हैं गोस्वामी तुलसीदास

Posted On: 13 Aug, 2013  
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कौन है असली गुरु ?

Posted On: 22 Jul, 2013  
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कुदरत का कहर

Posted On: 22 Jun, 2013  
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शत्रु नहीं हमारे मित्र हैं ‘शनि’

Posted On: 8 Jun, 2013  
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ख़ुद से…बग़ावत

Posted On: 6 Sep, 2012  
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बदरी की अभिलाषा

Posted On: 6 Sep, 2012  
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Hello world!

Posted On: 14 Aug, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: pandit pandit

श्री मान सत्य यही है आपके लेख का सार , हजारों वर्ष बीत गए आज भी अज्ञान के क्षितिज पर बुद्ध अकेले प्रज्ञा के धूमकेतु हैं। मानवता अपने ही बने जाल में उलझी खड़ी है, हमने पंछियों को उड़ा दिया, पशुओं को खदेड़ दिया, रिश्तों की हांड़ी में विष पका बैठे, स्वार्थ की पताकाएँ फहराकर हम सबको जीतने तो निकले मगर खुद से हार गए, धरती को खोद डाला,आकाश को बेध दिया, हवा बिगाड़ ली, जल प्रदूषित कर दिया। इंसानियत की आग पर बर्फ रख दी और धर्म के अलाव पर सब कुछ जला डाला। धरती पर आड़ी-टेढ़ी रेखायें खींचकर अपने -अपने देशों के झंडे फहरा दिए। इस सबसे दूर, बहुत दूर खड़ी असहाय धरा तुम्हें पुकार रही है तथागत आओ अभी भी तुम्हारी ज़रूरत है !शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

त्तराखंड के मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि विकास कार्यों को पूर्ण होने में कईं साल लग जायेंगे।केदारनाथ यात्रा तो एक साल से पहले शुरू ही नहीं हो सकती ? आपको याद होगा सन 2004-5 में ब्रिटेन में आई जबरदस्त बाढ़ में सब तबाह हो गया था।लेकिन कुछ ही महीनों के अंतराल पर वहां के शहर और सड़कें पहले से भी अधिक समुन्नत दिखाई दे रहे थे।जापान में 11 मार्च 2011 को आई सुनामी में भयंकर तबाही हुई थी।इसे द्वितीय विश्व युद्ध सरीखी विभीषिका की संज्ञा दी गयी थी लेकिन उसी वर्ष माह जून में जब विश्व बैंक की टीम ने वहां का दौरा किया तो जापान पहले से भी बढ़िया हालत में था। प्राकृतिक आपदा के उपरान्त हमारे पडौसी देश चीन ने भी हैरतंगेज ढंग से नुकसान को सहेजने में सफलता अर्जित की है।12 मार्च 2013 में मॉरिशस में आई बाढ़ में सात लोगों की मृत्यु हो गई थी ,इस घटना को वहां राजकीय शोक मानकर अवकाश घोषित किया गया, लोगों ने अपने घरों से टी वी फ्रिज़ तथा घरेलू सामानों का पीड़ितों के घरों के बाहर अम्बार लगा दिया।तीन दिन में क्षतिग्रस्त क्षेत्र को पुनः संवार दिया गया।विदेशों से विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया।मैं उस वक़्त मॉरिशस में ही था ,वहां के उप प्रधानमंत्री अनिल बेचू ने मुझे बताया कि हम मानवीय स्तर पर भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति कभी भी नहीं होने देंगे। उत्तराखंड के हादसे में प्रभावित लोगों के साथ आज पूरा देश खडा है ! हम आपदा को नहीं रोक सकते लेकिन घाव पर मर्हाम जरुर लगा सकते हैं

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

शब दर्चन जी आपने उत्तराखंड की तबाही के बारे में सही आंकड़े प्रस्तुत किये हैं ! आपने पिछले आकंड़ों को जनता के सामने लाकर प्रदेश तथा केंद्र सरकार को सोते से जगा दिया है ! आज आने जाने के सुगम साधन मोबाईल हर आदमी की जेब में, मौसम की जानकारी के लिए नयी तकनीक होने के बावजूद मंत्री मंडल और नौकरशाहों की अकर्मण्यता अयोग्यता और निकम्मेपन के कारण हजारों लोग अकाल मृत्यु को प्राप्त हो गए ! अभी भी हजारों की संख्या में जगह जगह फंसे पड़े हैं ! विजय बहुगुणा सरकार क्या सो रही थी जब सरकार को चार दिन पहले ही आने वाली आपदा के बारे में सूचना दे दी गयी थी फिर उसी दिन यात्रा को क्यों नहीं रोका गया ! कुदरती कहर से बचने के लिए पहले से क्यों तैय्यारियाँ नहीं की गयी थी ? अब तो प्रदेश में और केंद्र में कांग्रेस सरकार थी ! विजय बहुगुणा अपनी गोटी बिठाने लगे हैं उन्हें क्या मतलब कोई जीए कोई मरे ! अफाराधियों को जब देश पर आपात्कान बादल मंडराने लगते हैं तो सेना के जवान याद आते हैं ! पेंशन भता किसका बढ़ता है सांसद, विधायक और मंत्री मंडल का ! अगर विकास कार्यों में हे हेर फेर मिलावटी सामान नहीं मिलाया गया होता तो आज यह हालत नहीं होती ! अफाराधियों को सजा तो मिलेगी यहाँ नहीं तो वहां ! सार्थक लेख के लिए बधाई ! हरेन्द्र जागते रहो

के द्वारा: harirawat harirawat




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